रुम्मिनदेई स्तम्भलेख

भूमिका

रुम्मिनदेई स्तम्भलेख अशोक द्वारा स्थापित स्तम्भलेखों में से ‘लघु स्तम्भलेख’ ( minor pillar-edict ) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। यह हिमालय के तराई क्षेत्र में पाया गया है अतः इसके साथ-साथ निगालीसागर लघु स्तम्भलेख को कभी-कभी ‘तराई स्तम्भलेख’ भी कह दिया जाता है।

इस अभिलेख से कई बातों की सूचना मिलती है; यथा – यह स्थल गौतमबुद्ध की जन्मस्थली है, स्वयं सम्राट अशोक यहाँ पर आये थे इत्यादि।

रुम्मिनदेई लघु स्तम्भलेख
रुम्मिनदेई स्तम्भलेख

रुम्मिनदेई स्तम्भलेख : संक्षिप्त परिचय

नाम :- रुम्मिनदेई स्तम्भलेख या रुम्मिनदेई लघु स्तम्भलेख ( Rummindei Minor Pillar-Edict )।  इसको लुम्बिनी स्तम्भलेख और पडेरिया स्तम्भलेख भी कहा जाता है।

स्थान :- पडेरिया या परेरिया के निकट रुम्मिनदेई मन्दिर, नेपाल तराई  ( उत्तर प्रदेश के नौतनवा रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर उत्तर में स्थित है। )।

भाषा :- प्राकृत।

लिपि :- ब्राह्मी।

समय :- अशोक के राज्याभिषेक का २०वाँ वर्ष लगभग २४९ ई०पू०

विषय :- अशोक द्वारा बुद्ध के जन्मस्थान की यात्रा के स्मारक में स्तम्भ स्थापना और वहाँ के आठवाँ भाग मुक्त करना।

रुम्मिनदेई स्तम्भलेख : मूलपाठ

१ – देवानंपियेन पियदसिन लाजिन वीसति-वसाभिसितेन

२ – अतन आगाच महीयिते हिद बुधे जाते सक्य-मुनी ति [ । ]

३ – सिला-विगड-भीचा कालापित सिला-थमे ( -थभे ) च उसपापिते [ । ]

४ – हिंद भगवं जाते ति लुंमिनि-गामे उबलिके कटे

५ – अठ-भागिये च [ ॥ ]

  • कारपेण्टर तथा हुल्श का पाठ : सिला विगडभी चा = ‘एक अश्व धारण करने वाला प्रस्तर।’ परन्तु यह पाठ उचित नहीं लगता।
  • भगवं = भगवान; जिसमें ईश्वरीय गुण, धर्म, यश, श्री आदि हों।

संस्कृत छाया

देवानां प्रियेण प्रियदर्शिना राज्ञा विशतिवर्षाभिषिक्तेन आत्मनागत्य महीयितमिह बुद्धो जातः शाक्यमुनिरिति। शिला विकृतभित्तिश्च कारिता शिला स्तम्भश्चोत्थापित इह भगवज्जात इति लुम्बिनी ग्रामः उद्वलिकः कृतोऽष्टभागी ची।

हिन्दी अनुवाद

१ – राज्याभिषेक के बीस वर्ष बाद देवताओं के प्रिय प्रियदर्शी राजा द्वारा

२ – यहाँ स्वयं आकर पूजा की गयी क्योंकि यहीं बुद्ध शाक्यमुनि जन्म लिये थे।

३ – यहाँ पत्थर की दृढ़ दीवार बनवायी गयी एवं शिला-स्तम्भ खड़ा किया गया

४ – क्योंकि यहाँ भगवान बुद्ध उत्पन्न हुए थे। अतएव लुम्बिनी ग्राम को करमुक्त किया गया

५ – और अष्टभागो ( अष्टभागिक ) बनाया गया।

टिप्पणी

यह लघु स्तम्भलेख अन्य सभी लेखों से सर्वथा भिन्न है। इसमें सम्राट अशोक ने किसी भी रूप में धर्म का प्रतिपादन न कर एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य का उल्लेख किया है

इससे ज्ञात होता है कि जिस क्षेत्र में यह स्तम्भ स्थापित है, वह क्षेत्र लुम्बिनी है। यहाँ पर गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था।

यहाँ पर सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के बीसवें वर्ष में आकर पूजा की थी और वहाँ भगवान् बुद्ध की जन्मस्थली को पत्थर की विशाल दीवार से घिरवाया था। अशोक ने यहाँ पर एक स्तम्भ स्थापित किया था।

यह एकमात्र आर्थिक अभिलेख है। क्योंकि अशोक ने लुम्बिनी ग्राम को करमुक्त ( उद्दबलिक ) कर दिया था और शस्य-कर घटाकर अष्टमांश ( १/८ ) कर दिया।

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