दर्शन

भारतीय और पाश्चात्य दर्शन में अंतर या तुलना

भूमिका एक जीवंत सभ्यता और संस्कृति का अपना विशिष्ट दर्शन होता है। ‘भारतीय दर्शन’ और ‘पाश्चात्य दर्शन’ का नामकरण भी इसी तथ्य को प्रमाणित करता है कि दोनों दर्शन एक दूसरे से भिन्नता रखते हैं। दर्शन की भाँति विज्ञान के क्षेत्र में हम ऐसा अन्तर नहीं कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में विज्ञान के सम्बन्ध …

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वैदिक देवता

भूमिका ऋग्वैदिक आर्यों का सामाजिक व आर्थिक जन-जीवन जितना सरल था, धार्मिक जीवन उतना ही अधिक विशद और जटिल। यहाँ हमें प्रारम्भ में ‘बहुदेववाद’ के दर्शन होते। यह बहुदेववाद एकेश्वरवाद से होता हुआ एकवाद में प्रतिफलित होता है। इस एकवाद का पूर्ण परिपाक उपनिषदों में मिलता है। आर्यों के प्रधान देवता ‘प्राकृतिक’ शक्तियों के प्रतिनिधि …

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दर्शन क्या है?

भूमिका किसी भी विषय को पढ़ने, समझने, और आत्मसात करने के लिये पहली स्वाभाविक जिज्ञासा यह होती है कि – अमुक विषय क्या है? अथवा अमुक विषय की परिभाषा क्या है? अतः सबसे पहले हम यही जानने का प्रयास करेंगे कि — दर्शन क्या है? या दर्शन की परिभाषा क्या है? दर्शन किन प्रश्नों पर …

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